परिचय
मुंबई में स्कूल-कॉलेजों के पास चल रहा था नशे का धंधा: मुंबई पुलिस ने 6 जुलाई 2025 को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए शहर के अलग-अलग हिस्सों में स्थित स्कूल, कॉलेज और कोचिंग सेंटरों के पास की 2000 से अधिक पान और जनरल दुकानों पर छापा मारा। इस छापेमारी के दौरान कई दुकानों से नशीले पदार्थों, सिगरेट, तंबाकू और अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं की बिक्री की पुष्टि हुई।
इस कार्रवाई ने न सिर्फ मुंबई में तहलका मचा दिया, बल्कि देश भर में शिक्षा संस्थानों के इर्द-गिर्द नशे के फैलते जाल को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।
✍🏻 लेखक: रुपेश कुमार सिंह
कार्रवाई की मुख्य बातें
पुलिस ने मुंबई के Andheri, Kurla, Dadar, Kandivali, Malad और Chembur जैसे इलाकों में एक साथ संयुक्त ऑपरेशन चलाया।
कार्रवाई के दौरान 2,000 से अधिक पान और जनरल स्टोर्स की जांच की गई।
कई दुकानों को सील कर दिया गया, और कुछ को अस्थायी रूप से बंद किया गया है।
लगभग 150 दुकानदारों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
कुछ दुकानों से सिगरेट और गांजा जैसे प्रतिबंधित पदार्थ भी बरामद किए गए।
क्यों हुई ये कार्रवाई?
मुंबई पुलिस के अनुसार, उन्हें पिछले कुछ महीनों से लगातार शिक्षा संस्थानों के पास बच्चों और किशोरों के नशे की गिरफ्त में आने की खबरें मिल रही थीं। सोशल मीडिया, NGO रिपोर्ट्स और स्थानीय नागरिकों की शिकायतों के आधार पर पुलिस ने विशेष अभियान चलाने का फैसला लिया।
पुलिस उपायुक्त (DCP) स्तर पर निगरानी करते हुए यह एक pre-emptive action था ताकि युवा पीढ़ी को नशे के जाल से बचाया जा सके।
क्या मिला दुकानों से?
गुटखा, सिगरेट और तंबाकू की खुली बिक्री, जोकि स्कूल परिसर से 100 मीटर की दूरी तक कानूनन वर्जित है।
इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट (Vape) जो किशोरों में तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
कुछ दुकानों में गांजा, चरस और भांग जैसी चीजें छुपाकर रखी गई थीं।
कई जगहों पर 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को खुलेआम नशीले पदार्थ बेचे जा रहे थे।
छात्रों की सुरक्षा पर गहराता संकट
मुंबई जैसे मेट्रो शहर में शिक्षा केंद्रों के पास नशे की यह समानांतर दुनिया माता-पिता, शिक्षकों और प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय है। कुछ प्रमुख समस्याएं निम्नलिखित हैं:
1. बच्चों की पहुंच में नशा
कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं को ये पदार्थ आसानी से मिल जाते हैं।
नाबालिग बच्चों को सिगरेट बेचना कानूनन अपराध है, फिर भी खुलेआम बिक्री हो रही थी।
2. मनोरंजन से लत तक
शुरुआत शौक से होती है, लेकिन कई छात्र इससे आदतन उपभोक्ता बन जाते हैं, जिससे पढ़ाई, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन पर असर पड़ता है।
3. अपराध और ड्रग नेटवर्क से जुड़ाव
कई बार यही दुकानदार स्थानीय ड्रग सप्लायरों के साथ जुड़े होते हैं।
किशोरों को ‘कूल’ दिखने की चाह में नशा पकड़ में आता है और धीरे-धीरे गैंग या अपराध से भी जुड़ जाते हैं।
कानूनी प्रावधान: क्या कहता है कानून?
COTPA Act 2003 (The Cigarettes and Other Tobacco Products Act) के अनुसार किसी भी शैक्षणिक संस्था से 100 मीटर के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री प्रतिबंधित है।
नाबालिग को तंबाकू या सिगरेट बेचना अपराध है जिसमें दंड और जेल दोनों का प्रावधान है।
NDPS Act (Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act) के तहत किसी भी प्रकार का ड्रग्स रखना, बेचना या सप्लाई करना गंभीर अपराध है।
पुलिस का अगला कदम क्या होगा?
मुंबई पुलिस ने बताया कि:
ऐसी दुकानों की GPS लोकेशन मैपिंग की जा रही है।
जिन दुकानों से अवैध गतिविधियाँ मिली हैं, उन्हें स्थायी रूप से बंद करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
स्कूल-कॉलेज के प्रिंसिपलों और शिक्षकों से कहा गया है कि वे छात्रों पर निगरानी रखें और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी दें।
सामाजिक प्रतिक्रिया और वायरल असर
इस कार्रवाई ने सोशल मीडिया पर जबरदस्त हलचल मचाई। ट्विटर, इंस्टाग्राम और लोकल न्यूज़ चैनलों पर इस विषय पर हज़ारों पोस्ट और वीडियो वायरल हो चुके हैं। प्रमुख प्रतिक्रियाएं:
अभिभावकों ने पुलिस की इस कार्रवाई का स्वागत किया।
एनजीओ और एक्टिविस्ट्स ने मांग की कि ऐसी छापेमारी हर महीने नियमित रूप से होनी चाहिए।
कुछ दुकानदारों ने विरोध भी जताया और कहा कि बिना पर्याप्त जांच के कार्रवाई की जा रही है।
आगे की राह: क्या होना चाहिए?
✅ स्थायी निगरानी तंत्र
हर थाना अपने क्षेत्र में स्कूल-कॉलेज के 100 मीटर दायरे में तंबाकू/नशा-विरोधी निगरानी टीम गठित करे।
✅ जन-जागरूकता अभियान
छात्रों के लिए “Say No To Drugs” कैंपेन चलाया जाए।
अभिभावकों को मनोवैज्ञानिक ट्रेनिंग दी जाए कि वे बच्चों में बदलते व्यवहार को कैसे पहचानें।
✅ पॉलिसी स्तर पर सख्ती
BMC और शिक्षा विभाग को मिलकर ऐसे दुकानों के लाइसेंस नवीनीकरण पर रोक लगानी चाहिए जो कानून का उल्लंघन करते हैं।
यह भी पढ़े: मुंबई रियल एस्टेट 2025: रिकॉर्ड रजिस्ट्रेशन के पीछे का सच — क्या यह बुलबुला है या निवेशकों का भरोसा?
निष्कर्ष
मुंबई पुलिस की 6 जुलाई की यह कार्रवाई एक ज़रूरी और समयोचित कदम है, जो यह दिखाता है कि प्रशासन अब युवाओं की मानसिक और शारीरिक सुरक्षा को लेकर सजग है। लेकिन यह एक बार की कार्रवाई नहीं, बल्कि एक लगातार चलने वाली मुहिम बननी चाहिए, जिसमें समाज, अभिभावक, शिक्षक और प्रशासन सभी की भागीदारी हो।

