Sunday, April 12, 2026
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भारत में Rare Earth Magnets का उत्पादन: चीन पर निर्भरता घटाने की ऐतिहासिक पहल

🔷 प्रस्तावना

भारत सरकार ने 12 जुलाई 2025 को घोषणा की कि हैदराबाद में रेयर अर्थ मैग्नेट्स (Rare Earth Magnets) के घरेलू उत्पादन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। यह निर्णय तकनीकी आत्मनिर्भरता, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति शृंखला में भारत की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

✍🏻 लेखक: रुपेश कुमार सिंह


🔷 रेयर अर्थ मैग्नेट्स क्या होते हैं?

रेयर अर्थ मैग्नेट्स, विशेष प्रकार के शक्तिशाली मैग्नेट्स होते हैं जो इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs), विंड टर्बाइंस, मोबाइल फोन्स, मेडिकल उपकरणों, और रक्षा प्रणालियों में बड़े पैमाने पर उपयोग किए जाते हैं। ये मैग्नेट्स Neodymium, Samarium जैसे दुर्लभ धातुओं से बनाए जाते हैं।


🔷 अब तक भारत की स्थिति क्या थी?

  • भारत में रेयर अर्थ धातुओं का खनिज भंडार तो मौजूद है, लेकिन इनका शोधन और मैग्नेट उत्पादन बहुत सीमित था।

  • भारत 90% से अधिक Rare Earth Magnets चीन से आयात करता रहा है।

  • चीन दुनिया का सबसे बड़ा Rare Earth Supplier है, और इसी वजह से वैश्विक उद्योग उस पर अत्यधिक निर्भर हैं।


🔷 हैदराबाद परियोजना का महत्व

  • यह पहल Indian Rare Earths Limited और Bhabha Atomic Research Centre (BARC) के सहयोग से की जा रही है।

  • इस परियोजना के तहत rare earth separation, metal refining, और magnet fabrication की तकनीकों को भारत में विकसित किया जाएगा।

  • उत्पादन वर्ष 2026 की पहली तिमाही से शुरू होने की उम्मीद है।


🔷 क्यों यह कदम रणनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है?

  1. राष्ट्रीय सुरक्षा:
    रक्षा उपकरणों (जैसे फाइटर जेट्स, मिसाइल्स, रडार) में Rare Earth Magnets अनिवार्य होते हैं। घरेलू उत्पादन भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को बढ़ाएगा।

  2. इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बूस्ट:
    भारत में EV उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा क्योंकि सबसे महंगे पार्ट्स में से एक – मैग्नेट्स – अब देश में ही उपलब्ध होंगे।

  3. ग्लोबल सप्लाई चेन में भागीदारी:
    अमेरिका, यूरोप और जापान पहले से ही चीन से हटकर दूसरे देशों की ओर देख रहे हैं। भारत के पास एक वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता बनने का अवसर है।


🔷 भारत को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा?

  • उच्च तकनीकी विशेषज्ञता की जरूरत:
    Rare Earths को प्रोसेस करना अत्यंत जटिल और विषैली प्रक्रिया होती है।

  • पर्यावरणीय चुनौतियाँ:
    इस प्रक्रिया में विषाक्त अपशिष्ट निकलते हैं, जिससे पर्यावरणीय संतुलन पर असर हो सकता है। भारत को Sustainable और Green Processing टेक्नोलॉजी की जरूरत होगी।

  • वैश्विक प्रतिस्पर्धा:
    चीन की लागत बेहद कम है। भारत को प्रतिस्पर्धी दामों पर सप्लाई देने की रणनीति विकसित करनी होगी।


🔷 सरकार की नीतिगत पहलें

  • “क्रिटिकल मिनरल मिशन” के तहत भारत ने Rare Earth Minerals को प्राथमिकता सूची में डाला है।

  • सरकार विदेशी निवेश (FDI) को आकर्षित करने के लिए PLI स्कीम (Production Linked Incentives) पर भी विचार कर रही है।


🔷 भविष्य की संभावनाएँ

  • भारत एशिया में Rare Earth Magnets का प्रमुख निर्यातक बन सकता है।

  • Make in India और Atmanirbhar Bharat के तहत यह परियोजना आत्मनिर्भरता की दिशा में मील का पत्थर बन सकती है।

  • इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और ग्रीन एनर्जी सेक्टर को घरेलू आपूर्ति चेन से नया बल मिलेगा।


यह भी पढ़े: SEBI बनाम Jane Street विवाद: क्या भारत में बाजार नियमन की नई दिशा तय हो रही है?

🔷 निष्कर्ष

भारत द्वारा Rare Earth Magnets का घरेलू स्तर पर उत्पादन शुरू करना एक क्रांतिकारी निर्णय है। यह न केवल तकनीकी और औद्योगिक आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि यह भारत की वैश्विक रणनीतिक स्थिति को भी मजबूत करेगा। आने वाले वर्षों में यह पहल भारत को Rare Earth Global Hub बना सकती है।

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