Sunday, April 12, 2026
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PLI योजना 2025 से Next‑Gen भारत: Subsidies से Component Manufacturing तक का सफर

प्रस्तावना: PLI और Make in India की अब तक की यात्रा

PLI योजना 2025 से Next‑Gen भारत: भारत सरकार ने 2020 में COVID-19 के बाद आर्थिक पुनरुद्धार और आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देने के लिए PLI (Production-Linked Incentive) योजना की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य उत्पादन बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने का था। इस योजना से मोबाइल, फार्मा, ऑटो, इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे 14 सेक्टर्स को लाभ हुआ।

अब 2025 में, केंद्र सरकार ने इसी PLI योजना 2025 को component manufacturing पर केंद्रित करते हुए दोबारा डिज़ाइन किया है। यानी अब केवल फाइनल प्रोडक्ट नहीं, बल्कि उनके ज़रूरी पार्ट्स और कंपोनेंट्स भी भारत में बनने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।

✍🏻 लेखक: रुपेश कुमार सिंह


2. 🧩 PLI योजना 2025 में नया क्या है?

PLI योजना 2025 के अंतर्गत सरकार ने करीब ₹22,900 करोड़ के इंसेंटिव्स को उन कंपनियों के लिए निर्धारित किया है जो इंटरमीडिएट गुड्स और कंपोनेंट्स बनाएंगी।

इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • सेमीकंडक्टर पार्ट्स

  • मोबाइल और लैपटॉप के IC चिप्स

  • ग्रीन टेक्नोलॉजी कम्पोनेंट्स

  • ऑटोमोटिव सेंसर और EV पार्ट्स

  • इंडस्ट्रियल मशीनरी और टूलिंग इक्विपमेंट

 


3. 🔧 भारत को ‘असेंबली हब’ से ‘मैन्युफैक्चरिंग बेस’ बनाने की चुनौती

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने मोबाइल फोन्स के असेंबली में बड़ी छलांग मारी, लेकिन असल कंपोनेंट्स जैसे चिप, डिस्प्ले, बैटरी अभी भी चीन, कोरिया और ताइवान से आते हैं। इससे भारत का ट्रेड डेफिसिट तो बना ही रहता है, साथ ही वैल्यू एडिशन भी कम होता है।

नई PLI योजना 2025 का मकसद है –
➡️ भारत को केवल assembling नहीं, बल्कि डिजाइनिंग और निर्माण का केंद्र बनाना।
➡️ चीन पर निर्भरता को कम करना।


4. 🔍 कंपोनेंट निर्माण पर फोकस क्यों जरूरी है?

  • वैल्यू चेन में अपग्रेडिंग: अगर कोई देश फाइनल प्रोडक्ट तो बनाता है लेकिन कंपोनेंट्स नहीं, तो उसका असली लाभ विदेशी सप्लायर्स को जाता है।

  • रोज़गार का सृजन: कंपोनेंट निर्माण में skilled और semi-skilled वर्कफोर्स की ज़रूरत होती है।

  • नॉलेज ट्रांसफर: विदेशी कंपनियां भारत में निर्माण के साथ अपने टेक्नोलॉजी भी ट्रांसफर कर सकती हैं।


5. 🛠️ नई योजना से किन सेक्टर्स को मिलेगा फायदा?

सेक्टरअनुमानित लाभसंभावित रोजगार
इलेक्ट्रॉनिक्स₹9,000 करोड़ तक5 लाख+
ऑटोमोटिव₹5,000 करोड़2.5 लाख+
सेमीकंडक्टर्स₹6,000 करोड़1 लाख+
इंडस्ट्रियल मशीनरी₹2,900 करोड़50,000

इन सेक्टर्स में कंपनियों को 5 सालों तक उत्पादन बढ़ाने पर इंसेंटिव मिलेगा।


6. 🚗 विदेशी निवेश का नजरिया और Tesla का उदाहरण

Tesla जैसी कंपनियां भारत में EV मैन्युफैक्चरिंग को लेकर इच्छुक हैं, लेकिन उनके लिए जरूरी है कि यहां कंपोनेंट सप्लाई चेन मजबूत हो।

Tesla ने साफ किया है कि वे high-end मॉडल्स (जैसे Model Y) भारत लाना चाहते हैं, लेकिन लोकल कंपोनेंट सप्लायर्स के अभाव में यह संभव नहीं।

PLI योजना 2025 का यह नया अवतार भारत को global EV और electronics ecosystem से जोड़ने की दिशा में निर्णायक बन सकता है।


7. 🧱 मुख्य समस्याएं और आलोचना

  • ब्यूरोक्रेसी: PLI योजना 2025 के तहत फंड डिस्बर्सल में देरी अक्सर निवेशकों को निराश करती है।

  • GST क्रेडिट और इम्पोर्ट टैक्स: इनपुट पर टैक्स ज्यादा होने से उत्पादन महंगा पड़ता है।

  • R&D इंफ्रास्ट्रक्चर का अभाव: भारत में अभी भी core कंपोनेंट की डिजाइनिंग में विशेषज्ञता की कमी है।

  • फेडरल कोऑर्डिनेशन: राज्य सरकारों के बीच नीति समन्वय की कमी है।


8. 🌏 वैश्विक तुलना: भारत बनाम वियतनाम, मैक्सिको, चीन

पैरामीटरभारतवियतनाममैक्सिकोचीन
कंपोनेंट निर्माण लागतमध्यमकमउच्चकम
नीतिगत समर्थनसुधारशीलस्थिरअनिश्चितअधिशासी
स्किल्ड लेबरबढ़तीसीमितअच्छीउच्च
ट्रेड इंफ्रास्ट्रक्चरसुधाराधीनअच्छाबेहतरउत्कृष्ट

भारत को अपनी जगह मजबूत करने के लिए Ease of Doing Business और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार में और तेजी लानी होगी।


9. 🎯 भविष्य की दिशा और सुझाव

  • Design-to-Manufacturing नीति: भारत को केवल उत्पादन ही नहीं, R&D को भी प्रोत्साहित करना होगा।

  • Component Parks: जैसे मोबाइल parks बने, वैसे ही “Component Manufacturing Parks” बनाने होंगे।

  • State-level collaboration: राज्य सरकारों को उद्योग नीति में समन्वय बढ़ाना होगा।

  • Global Branding: भारत को “Affordable but Reliable Manufacturer” के तौर पर पोजिशन करना होगा।


यह भी पढ़े: Citi ने भारतीय शेयर बाजार को ‘Neutral’ क्यों कहा? जानिए इसका निवेशकों पर असर

🔚 निष्कर्ष: क्या यह भारत की विनिर्माण क्रांति की शुरुआत है?

PLI योजना 2025 भारत की विनिर्माण यात्रा में एक “डिजाइन से निर्माण” की क्रांति की शुरुआत हो सकती है। यदि इसे सही ढंग से लागू किया गया, तो भारत केवल मोबाइल असेंबली का केंद्र नहीं, बल्कि सेमीकंडक्टर, EV, मशीनरी और तकनीकी आत्मनिर्भरता में भी अगला बड़ा नाम बन सकता है।

 

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