Sunday, April 12, 2026
No menu items!
HomePolicy'वोकल फॉर लोकल' और PLI स्कीम: क्या भारत मैन्युफैक्चरिंग सुपरपावर बन सकता...

‘वोकल फॉर लोकल’ और PLI स्कीम: क्या भारत मैन्युफैक्चरिंग सुपरपावर बन सकता है?

🔶 प्रस्तावना

“वोकल फॉर लोकल” और “आत्मनिर्भर भारत” जैसे नारे अब केवल राजनैतिक भाषणों तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि ये भारत सरकार की औद्योगिक नीति का आधार बन चुके हैं। इसके साथ ही उत्पादन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम को देश की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को वैश्विक स्तर तक पहुँचाने के एक अहम कदम के रूप में देखा जा रहा है।

लेकिन बड़ा सवाल यह है: क्या ये योजनाएं भारत को मैन्युफैक्चरिंग सुपरपावर बना सकती हैं या ये केवल एक नीतिगत प्रयोग रह जाएंगी?

✍🏻 विश्लेषणरुपेश कुमार सिंह


🔷 ‘वोकल फॉर लोकल’: विचारधारा से नीति तक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने COVID-19 महामारी के दौरान “वोकल फॉर लोकल” की अपील की थी। इसका उद्देश्य था कि भारतवासी विदेशी वस्तुओं की जगह घरेलू उत्पादों को प्राथमिकता दें।

  • यह विचार आत्मनिर्भरता, स्वदेशी उत्पादों के समर्थन और छोटे व्यवसायों को बढ़ावा देने की रणनीति से जुड़ा है।

  • इससे घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन मिलता है, जिससे नौकरियां भी सृजित होती हैं।

  • लेकिन आलोचकों का मानना है कि बिना गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य के, ‘लोकल’ कभी ‘ग्लोबल’ नहीं बन सकता।


🔷 PLI स्कीम: मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने का हथियार

PLI (Production Linked Incentive) योजना को पहली बार 2020 में 3 प्रमुख क्षेत्रों के लिए शुरू किया गया था। आज यह 14 से अधिक सेक्टरों को कवर करती है, जिनमें मोबाइल निर्माण, फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल, ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स, और टेक्सटाइल शामिल हैं।

✅ स्कीम की मुख्य बातें:

  • कंपनियों को उनके उत्पादन पर प्रत्यक्ष वित्तीय प्रोत्साहन (5-13%) मिलता है।

  • इसका मकसद भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) में एक अहम खिलाड़ी बनाना है।

  • विदेशी कंपनियों को भारत में निवेश करने के लिए आकर्षित किया जा रहा है।

📈 अब तक की उपलब्धियाँ:

  • Apple जैसी कंपनियों ने भारत में उत्पादन बढ़ाया है।

  • भारत अब मोबाइल फोन उत्पादन में विश्व के शीर्ष 3 देशों में आ चुका है।

  • 2023 तक PLI स्कीम से ₹80,000 करोड़ से अधिक का निवेश आया।


🔶 बड़ी कंपनियाँ vs MSMEs

हालाँकि PLI स्कीम से बड़े कॉर्पोरेट घरानों को काफी लाभ मिला है, लेकिन MSMEs (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) के लिए यह स्कीम अपेक्षाकृत जटिल रही है।

  • आवेदन प्रक्रिया और डॉक्यूमेंटेशन चुनौतीपूर्ण हैं।

  • छोटे उद्योगों के पास बड़े निवेश की क्षमता नहीं होती।

  • इससे ‘आत्मनिर्भरता’ का उद्देश्य असमान हो सकता है।


🔶 वैश्विक प्रतिस्पर्धा: चीन को टक्कर देना आसान नहीं

भारत की कोशिश है कि वह चीन का विकल्प बने, खासकर पश्चिमी कंपनियों के लिए जो चीन से बाहर निवेश के नए विकल्प तलाश रही हैं।

लेकिन इसमें कई चुनौतियाँ हैं:

क्षेत्रभारतचीन
इंफ्रास्ट्रक्चरप्रगति परअत्याधुनिक
बिजली और लॉजिस्टिक्समहँगेसस्ते
स्किल्ड लेबरसीमितव्यापक
सरकारी प्रक्रियाजटिलकेंद्रीकृत निर्णय

हालांकि भारत लोकतंत्र है, लेकिन नीति-निर्माण और ज़मीन पर कार्यान्वयन में तेजी लाने की जरूरत है।


🔶 भविष्य के लिए चुनौतियाँ और अवसर

अवसर:

  • चीन+1 रणनीति से भारत को लाभ

  • भारत की युवा जनसंख्या

  • वैश्विक कंपनियों का झुकाव भारत की ओर

  • ‘ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग’ में नेतृत्व की संभावना

चुनौतियाँ:

  • नीति में लगातार बदलाव से निवेशकों की असमंजस

  • भूमि अधिग्रहण और पर्यावरण क्लीयरेंस में देरी

  • GST, श्रम कानून और टैक्स सिस्टम में जटिलताएँ

  • MSME के लिए वित्त और तकनीक की कमी


🔷 क्या ‘वोकल फॉर लोकल’ का मतलब आत्मनिर्भरता है?

‘वोकल फॉर लोकल’ केवल खरीदारी का नारा नहीं, बल्कि ‘लोकल को ग्लोबल’ बनाने की प्रक्रिया है।
सरकार अब सिर्फ आत्मनिर्भर बनने की बात नहीं कर रही, बल्कि एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड मैन्युफैक्चरिंग पर ज़ोर दे रही है।

ONDC, जेम पोर्टल, डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे प्लेटफॉर्म इस दिशा में एक मजबूत सपोर्ट सिस्टम बना रहे हैं।


यह भी पढ़े: वन नेशन, वन इलेक्शन: लोकतांत्रिक सुधार या संघवाद पर हमला?

🔶 निष्कर्ष: क्या भारत बन सकता है मैन्युफैक्चरिंग सुपरपावर?

भारत के पास मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की क्षमता है लेकिन इसके लिए सिर्फ स्कीम बनाना ही पर्याप्त नहीं। नीति, प्रशासन, निवेश और स्किल के बीच सामंजस्य बनाना होगा।

  • अगर PLI स्कीम को MSMEs तक सरलता से पहुँचाया जाए,

  • अगर ‘लोकल’ उत्पादों की गुणवत्ता और मार्केटिंग पर ध्यान दिया जाए,

  • और अगर लॉजिस्टिक्स, स्किल और नीति-निरंतरता में सुधार हो —
    तो भारत निश्चित रूप से चीन का वैकल्पिक मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस बन सकता है।

News Next
News Nexthttp://news-next.in
News Next is a digital news website that covers the latest news and developments from around the world. It provides timely updates on current events, politics, business, crime, technology, and many other important topics that shape society.The platform was founded by independent investigative journalist Rupesh Kumar Singh, who has more than 20 years of experience in journalism. With a strong commitment to credible reporting and in-depth analysis, News Next aims to deliver accurate, unbiased, and insightful news to its readers.Contact us: newsnextweb@gmail.com
RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments