भारत ने सामने आई रिपोर्टों की पुष्टि की है कि उसने हाल ही में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की ओर से जारी इज़राइल के ईरान पर हमलों की निंदा करने वाले बयान में भाग नहीं लिया।
🧭 MEA की आधिकारिक प्रतिक्रिया
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत ने SCO की इस विशेष बहस या बयान पर चर्चा में हिस्सा नहीं लिया। इसका अर्थ यह है कि भारत ने न तो पूर्ण सहमति दी और न ही किसी आलोचना में भाग लिया ।
⚠️ भारत की विदेश नीति की रणनीति
भारत ने एक निष्पक्ष और संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए बीच‑बीच में तनाव को नियंत्रित रखने और सभ्यता संवाद पर बल दिया, बजाय किसी तरह की संप्रेषित निंदा या समर्थन के ।
MEA ने क्षेत्रीय स्थिरता और तनाव नियंत्रण को अपनी प्राथमिकता बताई, जो भारत की रणनीतिक सतर्कता दर्शाता है ।
🤝 SCO में भारत की भूमिका
SCO में भारत एक सक्रिय सदस्य तो है, लेकिन उसने हाल ही में इज़राइल‑ईरान संघर्ष के मुद्दे पर सामने आए कथित बयान में शामिल होना टाल दिया, जिससे यह साफ़ संकेत गया कि भारत हर बहुध्रुवीय संगठन की पॉलिसी से कदम मिलाकर नहीं चलता
यह रवैया चीन‑पाकिस्तान‑रूस जैसी देशों के साथ SCO में पैठ के बावजूद भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को दर्शाता है।
📌 निष्कर्ष
भारत ने इस मुद्दे पर SCO की कड़ी निंदा से दूरी बनाकर यह संदेश दिया कि वह मध्य पूर्व तनाव को लेकर सीधे हस्तक्षेप से बचते हुए संवाद, कूटनीति और सामूहिक प्रयासों की पहल को प्राथमिकता देता है। यह कूटनीतिक संतुलन भारत‑अमेरिका‑इस्लामिक देशों जैसे अलग‑अलग साझेदारों के साथ रिश्तों को बनाए रखते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी भूमिका को परिभाषित करता है।

