परिचय
अरविंद केजरीवाल: भारतीय राजनीति में ऐसे कुछ ही नेता हुए हैं जिन्होंने व्यवस्था से बाहर खड़े होकर व्यवस्था को बदलने का बीड़ा उठाया हो। अरविंद केजरीवाल उन्हीं चेहरों में से एक हैं। एक आईआईटी इंजीनियर, एक IRS अधिकारी, एक RTI कार्यकर्ता और फिर एक राजनीतिक क्रांतिकारी, केजरीवाल की यात्रा प्रेरणा का स्रोत है। भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) की स्थापना और दिल्ली के मुख्यमंत्री बनने तक उनका सफर भारतीय राजनीति का एक नया अध्याय बन गया है।
✍🏻 लेखक: रुपेश कुमार सिंह
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
अरविंद केजरीवाल का जन्म 16 अगस्त 1968 को हरियाणा के हिसार जिले में हुआ। उनके पिता गोविंद राम केजरीवाल एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर थे। अरविंद की प्रारंभिक शिक्षा हिसार, सोनीपत और गाज़ियाबाद जैसे शहरों में हुई। पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहने वाले अरविंद ने IIT खड़गपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त की।
IRS अधिकारी से समाजसेवा की ओर
1995 में अरविंद केजरीवाल ने भारतीय राजस्व सेवा (IRS) में नौकरी जॉइन की। लेकिन यहाँ भी उन्होंने सिस्टम की कमियों को महसूस किया। उन्होंने देखा कि कैसे आम आदमी को हर जगह रिश्वत और भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है। इसी अनुभव ने उन्हें भीतर से झकझोर दिया और उन्होंने 2006 में स्वेच्छा से नौकरी छोड़ दी।
उसी वर्ष उन्हें भारत सरकार ने “रमण मैग्सेसे पुरस्कार” से सम्मानित किया — यह एशिया का नोबेल पुरस्कार माना जाता है।
RTI आंदोलन और ‘परिवर्तन’ संस्था की स्थापना
अरविंद केजरीवाल ने सूचना के अधिकार (RTI) के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। RTI को जन-जन तक पहुँचाने के लिए उन्होंने 2006 में “परिवर्तन” नामक NGO की शुरुआत की, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करता है।
उनकी RTI मुहिम से कई घोटालों का खुलासा हुआ और सरकारी पारदर्शिता में वृद्धि हुई। इस दौरान उन्हें जमीनी स्तर पर जनता के संघर्षों की गहरी समझ हुई।
अन्ना हज़ारे के साथ ‘जन लोकपाल आंदोलन’
2011 में देश में एक नया जनांदोलन उठा – जन लोकपाल आंदोलन, जिसकी अगुवाई कर रहे थे समाजसेवी अन्ना हज़ारे और उनके साथ थे अरविंद केजरीवाल, किरण बेदी, प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव जैसे लोग।
इस आंदोलन का उद्देश्य था – एक स्वतंत्र लोकपाल की स्थापना जो उच्च स्तर के भ्रष्टाचार की जांच कर सके। इस आंदोलन ने पूरे देश में हलचल मचा दी और लाखों लोग सड़कों पर उतर आए।
हालाँकि, यह आंदोलन पूर्णतः सफल नहीं हो सका। लेकिन इसने अरविंद केजरीवाल को जन समर्थन और पहचान दी।
आम आदमी पार्टी की स्थापना: व्यवस्था को अंदर से बदलने का प्रयास
अरविंद केजरीवाल ने महसूस किया कि भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए सिर्फ आंदोलन काफी नहीं, बल्कि राजनीति में उतरना जरूरी है। 2012 में उन्होंने “आम आदमी पार्टी” (AAP) की स्थापना की, जिसका नारा था — “झाड़ू चलाओ, भ्रष्टाचार भगाओ”।
पार्टी का लक्ष्य था:
आम जनता को राजनीति में भागीदार बनाना
पारदर्शी और जवाबदेह शासन
शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली-पानी जैसे मूलभूत मुद्दों पर ध्यान देना
दिल्ली की सत्ता तक पहुंचने की कहानी
2013 का विधानसभा चुनाव
AAP ने पहली बार 2013 में दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ा और चौंकाने वाले तरीके से 28 सीटें जीत लीं। अरविंद केजरीवाल ने 15 सालों से सत्ता में रही कांग्रेस पार्टी को बाहर कर दिया और आम आदमी पार्टी ने सरकार बनाई। हालांकि, यह सरकार सिर्फ 49 दिन चली।
2015 का ऐतिहासिक चुनाव
2015 में हुए दोबारा चुनाव में AAP ने इतिहास रच दिया – 70 में से 67 सीटें जीत कर दिल्ली की राजनीति में भूचाल ला दिया।
2020 का चुनाव
फरवरी 2020 में हुए चुनाव में भी AAP ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 62 सीटें जीतीं और अरविंद केजरीवाल लगातार तीसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बने।
AAP मॉडल: शिक्षा, स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाओं पर फोकस
AAP सरकार ने उन क्षेत्रों में काम किया जिन्हें बड़े राजनीतिक दल अक्सर नजरअंदाज करते रहे:
1. शिक्षा क्षेत्र में क्रांति
सरकारी स्कूलों की बिल्डिंग और इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधारा गया
टीचरों को विदेशों में ट्रेनिंग के लिए भेजा गया
“हैप्पीनेस करिकुलम” शुरू किया गया
2. स्वास्थ्य क्षेत्र में मोहल्ला क्लीनिक
आम लोगों के लिए मुफ्त इलाज
सस्ती और प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएँ
3. बिजली-पानी पर राहत
200 यूनिट तक मुफ्त बिजली
20,000 लीटर तक मुफ्त पानी
विवाद और आलोचनाएँ
केजरीवाल की राजनीति हमेशा साफ-सुथरी नहीं रही। उन्हें कई बार आरोपों, विवादों और अपने सहयोगियों से मतभेदों का सामना करना पड़ा:
पूर्व सहयोगियों जैसे प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव से टकराव
उपराज्यपाल से अधिकारों को लेकर लगातार संघर्ष
विज्ञापन पर खर्च को लेकर आलोचना
फिर भी, आम जनता का एक बड़ा वर्ग उनके कामों से संतुष्ट नजर आता है।
निजी जीवन और व्यक्तित्व
अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल भी IRS अधिकारी रह चुकी हैं। उनका परिवार हमेशा निजी दायरे में रहा है। वे सादा जीवन, उच्च विचार में विश्वास रखते हैं और डायबिटीज के मरीज होने के बावजूद हर दिन सुबह योग और प्राणायाम करते हैं।
उनका रहन-सहन आम राजनेताओं से बिल्कुल अलग रहा है।
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निष्कर्ष
अरविंद केजरीवाल एक ऐसे नेता हैं जिन्होंने लोगों के बीच से निकलकर लोगों के लिए सरकार बनाई। वे सिर्फ वादे नहीं करते, बल्कि ज़मीन पर योजनाओं को अमल में लाते हैं। उनके नेतृत्व में राजनीति में नवाचार, सादगी, और सेवा की भावना आई है।
उनका सफर इस बात का प्रमाण है कि यदि इरादे मजबूत हों और दृष्टि स्पष्ट हो, तो व्यवस्था के भीतर रहकर भी बदलाव लाया जा सकता है।

