परिचय:
HUL को मिली पहली महिला CEO: हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL), जो भारत की सबसे प्रतिष्ठित FMCG कंपनियों में से एक है, ने पहली बार अपने इतिहास में किसी महिला को CEO नियुक्त किया है। प्रिय नायर, जो अब तक कंपनी में मार्केटिंग और ब्यूटी एंड पर्सनल केयर डिविजन की हेड थीं, को जुलाई 2025 में नया CEO नियुक्त किया गया। यह कदम प्रतीकात्मक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है – लेकिन क्या यह भारत के कॉर्पोरेट जगत में महिला नेतृत्व की वास्तविक वृद्धि का संकेत देता है, या फिर यह अभी भी एक अपवाद है?
✍🏻 लेखक: रुपेश कुमार सिंह
🔸 प्रिय नायर की नियुक्ति क्यों खास है?
HUL जैसी विशाल और पुरानी कंपनी में CEO का पद संभालना अपने आप में बड़ी बात है।
प्रिय नायर 28 वर्षों से कंपनी में कार्यरत हैं और उन्होंने कई ब्रांड्स जैसे Lux, Dove, Glow & Lovely को लीड किया है।
उनकी नियुक्ति यह दिखाती है कि लंबी अवधि में प्रतिबद्धता, प्रदर्शन और रणनीतिक दृष्टिकोण महिला अधिकारियों को भी शीर्ष पदों तक पहुंचा सकता है।
🔸 भारत के कॉर्पोरेट क्षेत्र में महिला CEO की स्थिति
| मापदंड | आँकड़े (2024-2025) |
|---|---|
| Nifty 500 कंपनियों में महिला CEO | 19 (~3.8%) |
| महिला बोर्ड डायरेक्टर्स की हिस्सेदारी | ~17% |
| लीडरशिप रोल्स में महिलाएं (CXO लेवल) | 11-12% |
जबकि भारत में कई महिलाएं नौकरी कर रही हैं, लेकिन नेतृत्व के शीर्ष पदों तक बहुत कम पहुँच पाती हैं।
कॉर्पोरेट संस्कृति, पारिवारिक जिम्मेदारियां और लैंगिक पूर्वाग्रह अब भी बाधा बने हुए हैं।
🔸 प्रतीकात्मक बनाम प्रणालीगत बदलाव
✅ सकारात्मक संकेत:
प्रिय नायर जैसे उदाहरण लड़कियों और युवा महिलाओं के लिए रोल मॉडल बन सकते हैं।
यह कंपनियों को भी यह संदेश देता है कि विविधता के ज़रिए प्रदर्शन को बेहतर बनाया जा सकता है।
विदेशी निवेशकों के लिए भी यह “प्रगतिशील गवर्नेंस” का संकेत हो सकता है।
⚠️ लेकिन चुनौतियाँ भी हैं:
क्या अन्य कंपनियाँ भी इसी दिशा में आगे बढ़ेंगी?
क्या यह नियुक्ति “एक अपवाद” बनकर रह जाएगी या नया ट्रेंड शुरू करेगी?
क्या यह परिवर्तन ज़मीनी स्तर तक – यानि मिड-लेवल और एंट्री-लेवल महिला कर्मचारियों को भी लाभ पहुंचाएगा?
🔸 नीतिगत पहल और कानून
भारत सरकार ने Companies Act, 2013 में संशोधन कर बोर्ड में एक महिला निदेशक अनिवार्य किया था।
SEBI ने भी लिस्टेड कंपनियों में कम-से-कम एक महिला निदेशक रखने की अनिवार्यता लागू की है।
लेकिन यह मात्र “टोकन अपॉइंटमेंट” नहीं होनी चाहिए – बल्कि उनमें निर्णय लेने की ताकत होनी चाहिए।
🔸 वैश्विक तुलना
| देश | महिला CEO का प्रतिशत (2025) |
|---|---|
| अमेरिका (Fortune 500) | ~10.4% |
| यूके | ~8.7% |
| भारत | ~3.8% |
भारत अभी भी विकसित देशों की तुलना में पीछे है।
लेकिन प्रिय नायर जैसी नियुक्तियां इस अंतर को धीरे-धीरे कम कर सकती हैं।
🔸 आगे की राह: क्या होना चाहिए?
लीडरशिप ट्रेनिंग प्रोग्राम: कंपनियों को महिलाओं के लिए विशेष प्रशिक्षण देने चाहिए।
वर्कप्लेस फलेक्सिबिलिटी: मातृत्व अवकाश, वर्क फ्रॉम होम, और डे-केयर जैसी सुविधाएं लागू करनी चाहिए।
मेंटॉरिंग नेटवर्क: सीनियर महिला लीडर्स को जूनियर महिलाओं का मार्गदर्शन करना चाहिए।
डाटा ट्रांसपेरेंसी: कंपनियों को अपने जेंडर-डाइवर्सिटी आंकड़े सार्वजनिक करने चाहिए।
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निष्कर्ष:
प्रिय नायर की HUL में CEO के रूप में नियुक्ति एक ऐतिहासिक कदम है, लेकिन यह तब तक प्रभावी नहीं होगा जब तक कि भारतीय कॉर्पोरेट संस्कृति में व्यापक और स्थायी बदलाव न आएं। यह एक प्रेरणादायक शुरुआत है, लेकिन मंज़िल अभी दूर है।
अगर यह ट्रेंड बना रहा, तो न केवल कंपनियों का प्रदर्शन सुधरेगा, बल्कि भारत का कॉर्पोरेट चेहरा भी अधिक समावेशी और आधुनिक हो सकेगा।

