मॉनसून 2025: 2025 का मानसून भारत के लिए कई मायनों में अहम है। IMD (भारतीय मौसम विभाग) ने सामान्य से थोड़ा कम बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि सरकार और किसान मिलकर कृषि रणनीति को मौसम के अनुरूप ढालें।
✍🏻 लेखक: रुपेश कुमार सिंह
मॉनसून का कृषि पर प्रभाव
- भारत की 60% खेती मानसून पर निर्भर है।
- धान, कपास, सोयाबीन जैसे फसलों की बुवाई बारिश से जुड़ी होती है।
सरकार की तैयारी
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बदलाव कर दावे की प्रक्रिया को और आसान बनाया गया।
- कृषि ड्रोन नीति के तहत सिंचाई, छिड़काव और निगरानी के लिए तकनीक का उपयोग बढ़ा।
- ई-नाम प्लेटफॉर्म से किसानों को बेहतर मूल्य मिल रहा है।
किसानों की स्थिति
- सिंचाई की सुविधा अब भी सीमित।
- कृषि ऋण पर ब्याज दरों में गिरावट की मांग बढ़ रही है।
- MSP को कानूनी रूप देने की माँग फिर उठी है।
सुझाव
- सूखा संभावित क्षेत्रों में वैकल्पिक फसल योजना लागू करनी चाहिए।
- जल संचयन और माइक्रो इरिगेशन को बढ़ावा देना होगा।
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निष्कर्ष
मॉनसून 2025 भारत की कृषि अर्थव्यवस्था की परीक्षा है। यदि सरकार और किसान समय रहते रणनीति बनाएं, तो कम बारिश के बावजूद उत्पादन में स्थिरता आ सकती है।

