🔷 पृष्ठभूमि:
ब्रिटेन के इंग्लैंड और वेल्स में आज संसद में एक ऐतिहासिक और संवेदनशील विधेयक पर बहस और मतदान हुआ — Assisted Dying Bill, जिसका उद्देश्य गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को, जो केवल 6 महीने या कम समय तक जीवित रह सकते हैं, स्वैच्छिक मृत्यु का वैधानिक अधिकार देना है।
🔷 विधेयक का उद्देश्य:
इस विधेयक के अनुसार, कोई भी 18 वर्ष से अधिक उम्र का व्यक्ति, जो चिकित्सकीय रूप से साबित तौर पर गंभीर और लाइलाज बीमारी से ग्रस्त है और जिसकी जीवन प्रत्याशा 6 महीने से कम है, वह सुरक्षित और निगरानीपूर्ण प्रक्रिया के तहत अपनी जीवन-समाप्ति का विकल्प चुन सकता है।
🔷 मुख्य विशेषताएँ:
पूर्व प्रस्तावित व्यवस्था में न्यायालय की अनुमति आवश्यक थी, जिसे हटा दिया गया है।
अब दो स्वतंत्र डॉक्टरों के साथ-साथ एक बहु-विशिष्ट पैनल (जिसमें मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, कानूनी सलाहकार और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं) की सहमति आवश्यक होगी।
मरीज की मानसिक स्थिरता का मूल्यांकन अनिवार्य है।
किसी भी प्रकार का विज्ञापन या प्रचार पूर्णतः निषिद्ध रहेगा।
🔷 विधेयक में संशोधन:
मानवाधिकार और नैतिकता से जुड़े विवादों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा उपायों को और अधिक सख्त किया गया है।
बिल में यह भी व्यवस्था की गई है कि यदि किसी रोगी को खाने-पीने या इलाज से परहेज करते हुए मौत की स्थिति में जाना हो, तो उसे भी मानवीय रूप से देखा जाएगा।
एक स्वतंत्र निगरानी रिपोर्ट एक वर्ष के भीतर पल्लियेटिव केयर (देखभाल चिकित्सा) पर इस कानून के प्रभाव का मूल्यांकन करेगी।
🔷 समर्थन और विरोध:
हालिया सर्वेक्षणों के अनुसार ब्रिटेन की लगभग 75% जनसंख्या इस विधेयक के समर्थन में है।
कुछ सांसदों और धार्मिक समूहों ने इसका विरोध किया है, उनका मानना है कि यह विधेयक बुज़ुर्गों, विकलांगों और मानसिक रूप से कमजोर लोगों पर सामाजिक या पारिवारिक दबाव का कारण बन सकता है।
कई विरोधी इसे “कमजोरों के लिए खतरनाक” और “प्रक्रिया में जल्दबाज़ी” मानते हैं।
🔷 संसद में स्थिति:
आज House of Commons में इस विधेयक पर चर्चा के बाद मतदान हुआ। यदि यह पास हो जाता है, तो अगला चरण House of Lords में विचार और संशोधन का होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह विधेयक पास नहीं होता, तो इसे पुनः लाने में कम से कम 10 वर्ष और लग सकते हैं।
यदि यह सभी चरणों को पार कर लेता है, तो इसके कानून में बदलने की प्रक्रिया 2029-30 तक पूरी हो सकती है।
🧭 निष्कर्ष:
“Assisted Dying Bill” ब्रिटेन के लिए एक भावनात्मक और नैतिक मोड़ पर खड़ा है। यह एक ओर गंभीर रूप से बीमार लोगों को सम्मानपूर्वक मृत्यु का विकल्प देता है, वहीं दूसरी ओर इससे जुड़े नैतिक, सामाजिक और चिकित्सा सवालों पर गहन विचार आवश्यक है।

