समान नागरिक संहिता (UCC) भारत के संवैधानिक ढाँचे में एक लंबे समय से बहस का विषय रहा है। 2025 में यह बहस एक बार फिर तेज हो गई है, जब विधि आयोग ने इस विषय पर रिपोर्ट पेश की और केंद्र सरकार ने संसद में इस मुद्दे पर चर्चा शुरू की।
✍🏻 लेखक: रुपेश कुमार सिंह
UCC का उद्देश्य क्या है?
UCC का मुख्य उद्देश्य देश में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून प्रणाली लागू करना है, जिससे धार्मिक आधार पर कानूनों में असमानता समाप्त हो सके। विवाह, तलाक, गोद लेना, और संपत्ति विरासत जैसे मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून हो।
वर्तमान स्थिति
- हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, पारसी समुदायों के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ हैं।
- कुछ राज्य जैसे गोवा पहले से ही UCC की कुछ प्रथाओं को अपनाते हैं।
पक्ष में तर्क
- समानता और न्याय: सभी नागरिकों को समान अधिकार देना संविधान का मूल सिद्धांत है।
- महिला सशक्तिकरण: मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा हेतु एक समान कानून आवश्यक।
- राष्ट्रीय एकता: एकसमान कानून से सांप्रदायिक एकता और राष्ट्रीयता को बढ़ावा मिलेगा।
विरोध में तर्क
- धार्मिक स्वतंत्रता पर आघात: संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित की गई है।
- अल्पसंख्यकों में डर: UCC को कुछ लोग बहुसंख्यकवाद का उपकरण मानते हैं।
- सांस्कृतिक विविधता का क्षरण: भारत की विविधता को एक कानून से नियंत्रित करना मुश्किल।
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निष्कर्ष
UCC एक संवेदनशील लेकिन आवश्यक कदम हो सकता है, यदि इसे व्यापक संवाद, सहभागिता और न्यायसंगत विधायी प्रक्रिया के तहत लागू किया जाए।

