🔷 प्रस्तावना:
21वीं सदी को अक्सर “इंडो-पैसिफिक की सदी” कहा जा रहा है। यह क्षेत्र न केवल विश्व की लगभग 60% जनसंख्या का घर है, बल्कि वैश्विक व्यापार का लगभग 70% यहीं से होकर गुजरता है।
हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में चीन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और भारत जैसी शक्तियों की सैन्य गतिविधियाँ, नौसेना अभ्यास और सामरिक गठबंधन तेजी से बढ़े हैं।
भारत, जो इस क्षेत्र का एक प्राकृतिक केंद्र है, अपनी समुद्री सुरक्षा रणनीति को लगातार अद्यतन कर रहा है ताकि वह आर्थिक हितों, भू-राजनीतिक स्थिरता और संप्रभुता की रक्षा कर सके।
✍🏻 लेखक: रुपेश कुमार सिंह
🌍 इंडो-पैसिफिक में सैन्य गतिविधियों की स्थिति:
🔸 चीन की आक्रामक नौसेना नीति:
दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम द्वीप निर्माण और सैन्य ठिकानों की स्थापना।
“String of Pearls” नीति के तहत हिंद महासागर में चीन के बंदरगाहों की शृंखला।
Belt and Road Initiative के समुद्री हिस्से से भू-राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने की कोशिश।
🔸 अमेरिका और सहयोगी शक्तियों की रणनीति:
AUKUS, QUAD और Malabar Exercise जैसे रक्षा गठजोड़।
अमेरिका की “Free and Open Indo-Pacific” नीति के तहत नौसेना की उपस्थिति बढ़ी।
ऑस्ट्रेलिया और जापान की भी सामरिक भागीदारी में वृद्धि।
यह भी पढ़े: इज़राइल और ईरान युद्ध का भू-राजनीतिक विश्लेषण और भारत पर प्रभाव
भारत की समुद्री सुरक्षा रणनीति: विश्लेषण
1. “Security and Growth for All in the Region (SAGAR)” नीति
भारत की यह नीति इंडो-पैसिफिक में शांति, स्थिरता और आर्थिक विकास को प्राथमिकता देती है। यह साझेदारी, क्षमता निर्माण और साझा समुद्री हितों की रक्षा पर केंद्रित है।
2. नौसेना की आधुनिकीकरण नीति
INS Vikrant जैसे स्वदेशी विमानवाहक पोतों का निर्माण
परमाणु पनडुब्बियों की संख्या बढ़ाना (Arihant वर्ग)
Coastal Surveillance नेटवर्क की स्थापना और UAV (ड्रोन) निगरानी क्षमता में इजाफा
3. अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह की रणनीतिक स्थिति का उपयोग
यह क्षेत्र मलक्का जलडमरूमध्य के निकट है, जो वैश्विक समुद्री व्यापार का chokepoint है।
भारत ने यहाँ सैन्य और निगरानी सुविधाओं को मजबूत किया है।
4. कूटनीतिक एवं सामरिक सहयोग
QUAD में सक्रिय भागीदारी
फ्रांस, इंडोनेशिया, वियतनाम जैसे देशों के साथ द्विपक्षीय नौसेना अभ्यास
ASEAN और IORA (Indian Ocean Rim Association) देशों से समुद्री सहयोग
5. Blue Economy और समुद्री संसाधनों की सुरक्षा
समुद्र में तेल, गैस, खनिज, और मछली पकड़ने जैसे संसाधनों की सुरक्षा अब भारत की सामरिक रणनीति का भाग बन चुकी है।
⚖️ रणनीतिक चुनौतियाँ:
चीन की आर्थिक और नौसैनिक बढ़त को संतुलित करना
हिंद महासागर में छद्म युद्ध और समुद्री डकैती जैसे असमरिक खतरों का सामना
कोस्टल इन्फ्रास्ट्रक्चर और मरीन डाटा नेटवर्क की अपर्याप्तता
क्षेत्रीय देशों के बीच सामरिक असहमतियाँ और प्रभाव क्षेत्र को लेकर प्रतिस्पर्धा
🧭 निष्कर्ष:
इंडो-पैसिफिक की रणनीतिक स्थिति वैश्विक शक्ति संतुलन में निर्णायक बनती जा रही है। भारत की सुरक्षा नीति अब केवल भूमि आधारित नहीं रह गई, बल्कि समुद्रों के माध्यम से रणनीतिक गहराई, ऊर्जा सुरक्षा, और वैश्विक व्यापार रक्षा तक फैल गई है।
भारत को अपनी नौसैनिक शक्ति, कूटनीतिक सक्रियता और टेक्नोलॉजिकल इंटेलिजेंस को एकीकृत करते हुए इस क्षेत्र में स्थिरता के केंद्र के रूप में उभरने की आवश्यकता है।

