✍🏻 लेखक: रुपेश कुमार सिंह
परिचय: आर्थिक आत्मविश्वास की ओर बढ़ता भारत
दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अब नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रही है। ICRA जैसी प्रतिष्ठित रेटिंग एजेंसी ने हाल ही में अनुमान जताया है कि भारत की GDP 2025‑26 में 6.5% से अधिक की दर से बढ़ सकती है। यह अनुमान ऐसे समय आया है जब वैश्विक मंदी, भूराजनीतिक संकट और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियाँ दुनिया की अधिकांश अर्थव्यवस्थाओं को धीमा कर रही हैं।
भारत की आर्थिक सफलता केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहराई से जुड़ी हुई रणनीतिक नीतियाँ, निवेश वातावरण और उपभोक्ता विश्वास हैं।
1. ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तेजी: भारत की असली ताकत
2024 के अंत में जो FMCG कंपनियों की रिपोर्ट सामने आई, उससे पता चलता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादों की मांग शहरी भारत से अधिक तेज़ी से बढ़ रही है। इसकी मुख्य वजह है—सरकारी योजनाएं, जैसे मनरेगा और पीएम किसान सम्मान निधि, जिसने ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने में मदद की है।
भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था अब केवल खेती पर निर्भर नहीं, बल्कि उसमें डिजिटल साक्षरता, छोटे व्यवसाय और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म की बढ़ती पहुंच ने एक नया बाजार बना दिया है।
2. कर सुधार और वित्तीय अनुशासन: निवेशकों को भरोसा
भारत सरकार ने 2025 के केंद्रीय बजट में कॉर्पोरेट टैक्स में रियायत, MSME के लिए कर प्रोत्साहन, और राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखने जैसे कई सुधारात्मक कदम उठाए।
बजट में दिखाया गया है कि सरकार GDP के 5.1% तक घाटा सीमित रखना चाहती है, जिससे बाजार में निवेशकों का आत्मविश्वास बढ़ा है।
3. मैन्युफैक्चरिंग और PLI स्कीम: Make in India की दूसरी क्रांति
Production Linked Incentive (PLI) Scheme अब केवल नीतिगत घोषणा नहीं रही। मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव और फार्मा सेक्टर में इस स्कीम ने हज़ारों करोड़ का निवेश आकर्षित किया है। इससे जुड़े निर्माण और निर्यात आंकड़े 2024 में 29% तक बढ़े।
Make in India अब सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ का आधार बन चुका है।
4. वैश्विक निवेश में भारत की पहली पसंद बनना
चीन से हटती वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं अब भारत की ओर मुड़ रही हैं। Ease of Doing Business रैंकिंग में भारत की स्थिति बेहतर हुई है, और 2024 में भारत ने $85 बिलियन का FDI आकर्षित किया, जो पिछले वर्षों की तुलना में रिकॉर्ड स्तर पर रहा।
भारत में विदेशी निवेश अब सिर्फ पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी और लॉजिस्टिक्स जैसे उभरते क्षेत्रों में भी बढ़ रहा है।
5. डिजिटल इंडिया और AI आधारित अर्थव्यवस्था का उदय
AI Special Economic Zones (SEZ) की घोषणा, ONDC (Open Network for Digital Commerce) का विस्तार, और 5G कनेक्टिविटी जैसी पहलें भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई गति दे रही हैं।
अनुमान है कि 2025 तक भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था $1 ट्रिलियन के पार जा सकती है, जिससे स्टार्टअप्स, नौकरियाँ और नवाचार में तेजी आएगी।
निष्कर्ष: रणनीतिक बदलावों की नींव पर टिकी है भारत की आर्थिक उड़ान
जहां एक ओर ग्रामीण मांग, मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल इंडिया, और वैश्विक निवेश जैसे कारक इस रफ्तार के इंजन हैं, वहीं सरकार की वित्तीय अनुशासन और टैक्स सुधार नीति इसे टिकाऊ बना रही है।
यदि वैश्विक परिस्थितियाँ स्थिर रहीं, तो भारत 2030 से पहले ही $5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में कदम रख सकता है।

