Friday, April 17, 2026
No menu items!
HomeIndiaआरबीआई का दो-दिनी रिवर्स-रेपो ऑक्शन: मौद्रिक नीति में तरलता नियंत्रण का बड़ा...

आरबीआई का दो-दिनी रिवर्स-रेपो ऑक्शन: मौद्रिक नीति में तरलता नियंत्रण का बड़ा कदम

परिचय:
आरबीआई का दो-दिनी रिवर्स-रेपो ऑक्शन: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 9 जुलाई 2025 को ₹1 लाख करोड़ (1 ट्रिलियन रुपये) के वेरिएबल रेट रिवर्स-रेपो (VRRR) ऑक्शन की घोषणा की है। यह दो-दिनी ऑक्शन मौद्रिक नीति के तहत प्रणाली में मौजूद अतिरिक्त तरलता को नियंत्रित करने के उद्देश्य से किया गया है। ऐसे कदमों का सीधा असर बैंकों की लेंडिंग क्षमताओं, ब्याज दरों और अंततः आम जनता तक पहुंचने वाले ऋणों पर पड़ता है।

✍🏻 लेखक: रुपेश कुमार सिंह


क्या है रिवर्स रेपो ऑक्शन?

रिवर्स रेपो वह प्रक्रिया है जिसमें बैंक अपनी अतिरिक्त नकदी को RBI के पास एक निश्चित ब्याज दर पर जमा कराते हैं। वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो ऑक्शन का मतलब है कि ब्याज दर को एक निश्चित सीमा के भीतर बोली के आधार पर तय किया जाता है।

RBI इस ऑक्शन के माध्यम से मार्केट में मौजूद अधिशेष नकदी (Excess Liquidity) को सोखने का प्रयास करता है ताकि ब्याज दरें स्थिर रहें और महंगाई पर नियंत्रण बना रहे।


क्यों जरूरी हुआ यह कदम?

1. तरलता की अधिकता:

मार्केट में इस समय काफी मात्रा में अधिशेष तरलता मौजूद है। कई बैंक अपने पास जमा नकदी को उत्पादक रूप से इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं।

2. ब्याज दरों में अस्थिरता:

जब बैंकों के पास अधिक नकदी होती है, तो वे कम ब्याज दरों पर एक-दूसरे को ऋण देने लगते हैं, जिससे रेपो रेट और बाजार दरों के बीच अंतर बढ़ता है।

3. महंगाई नियंत्रण:

अधिशेष तरलता से मांग में वृद्धि होती है, जिससे महंगाई बढ़ सकती है। VRRR जैसे उपायों से मांग को नियंत्रित किया जा सकता है।


इसका प्रभाव क्या पड़ेगा?

1. बैंकों की उधार देने की क्षमता घटेगी:

जब बैंक अपनी अतिरिक्त नकदी RBI को वापस देंगे, तो उनके पास कम ऋण देने के संसाधन बचेंगे।

2. ऋण महंगा हो सकता है:

ब्याज दरों में स्थिरता लाने के उद्देश्य से की गई यह कार्रवाई आम जनता को मिलने वाले होम लोन, पर्सनल लोन और बिज़नेस लोन को थोड़ा महंगा कर सकती है।

3. सरकार के लिए संकेत:

यह कदम दिखाता है कि RBI फिलहाल मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने को प्राथमिकता दे रहा है, न कि आर्थिक ग्रोथ को प्रोत्साहित करने को।


हालिया मौद्रिक नीति पृष्ठभूमि

24 जून 2025 को हुई मौद्रिक नीति बैठक में RBI ने रेपो रेट में 50 बेसिस पॉइंट की कटौती की थी और नीति रुख को ‘न्यूट्रल’ घोषित किया था। इस पृष्ठभूमि में यह रिवर्स रेपो ऑक्शन एक संतुलन साधने वाला कदम है।


विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?

  • इकोनॉमिस्ट्स का कहना है कि यह कदम बाजार में अस्थिरता को कम करने की कोशिश है, जिससे मुद्रा स्फीति और विकास दर के बीच संतुलन बना रहे।

  • बैंकरों का मानना है कि इससे उनकी लिक्विडिटी मैनेजमेंट में पारदर्शिता और अनुशासन आएगा।


यह भी पढ़े: भारत में युवाओं की बढ़ती बेरोजगारी और स्किल गैप: 2025 में रोजगार बनाम काबिलियत की खाई

निष्कर्ष:

RBI का यह ₹1 ट्रिलियन का वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो ऑक्शन भारत की आर्थिक स्थिति को स्थिर बनाए रखने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। इससे यह स्पष्ट होता है कि RBI प्रणाली में तरलता की अधिकता को नियंत्रित करने और ब्याज दरों में अनुशासन लाने के लिए सजग और सक्रिय है। आगे आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इसका क्या प्रभाव मुद्रा स्फीति, लोन बाजार और निवेश प्रवाह पर पड़ता है।

News Next
News Nexthttp://news-next.in
News Next is a digital news website that covers the latest news and developments from around the world. It provides timely updates on current events, politics, business, crime, technology, and many other important topics that shape society.The platform was founded by independent investigative journalist Rupesh Kumar Singh, who has more than 20 years of experience in journalism. With a strong commitment to credible reporting and in-depth analysis, News Next aims to deliver accurate, unbiased, and insightful news to its readers.Contact us: newsnextweb@gmail.com
RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments