मुंबई गैंगरेप केस: हैदराबाद के व्यवसायी शिव प्रसाद रेड्डी पर गैंगरेप का मामला, मुंबई सेशंस कोर्ट ने खारिज की अग्रिम जमानत याचिका
✍🏻 लेखक: रुपेश कुमार सिंह Follow Me
मुंबई पुलिस स्टेशन में हैदराबाद के व्यवसायी शिव प्रसाद रेड्डी और केदार शाह के खिलाफ एक 26 वर्षीय मॉडल और अभिनेत्री द्वारा गैंगरेप का मामला दर्ज किया गया है। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita – BNS) की धारा 64(1), 64(2)(d) और 3(5) के तहत दर्ज किया गया है।
✒️ शिकायत में लगाए गए गंभीर आरोप
पीड़िता ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि शिव प्रसाद रेड्डी और अन्य आरोपियों ने पिछले दो वर्षों में मुंबई, हैदराबाद, हांगकांग और मोरक्को जैसे विभिन्न स्थानों पर उसके साथ बार-बार यौन शोषण किया।
पीड़िता के अनुसार, शिव प्रसाद रेड्डी ने उससे शादी का झूठा वादा किया और उसे एक फिल्म में मुख्य भूमिका दिलाने का भरोसा देकर उसके विश्वास को जीता। इस झूठे विश्वास के चलते उसने रेड्डी के साथ यात्रा की और विभिन्न स्थानों पर गई, जहाँ उसका यौन शोषण किया गया।
🕵️♀️ मुंबई पुलिस कर रही है जांच
मुंबई पुलिस ने शिकायत दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है और संबंधित सबूत जुटाए जा रहे हैं।
⚖️ कोर्ट से बड़ा झटका – अग्रिम जमानत याचिका खारिज
इस मामले में ताजा अपडेट के अनुसार, मुंबई सेशंस कोर्ट ने आरोपी शिव प्रसाद रेड्डी की अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद शिव प्रसाद रेड्डी की गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई है।
🔍 आगे की कार्रवाई:
पुलिस अब रेड्डी और अन्य आरोपियों की भूमिका की गहनता से जांच कर रही है। कोर्ट के फैसले के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस कब और कैसे आरोपियों को हिरासत में लेती है।
📌 महत्त्वपूर्ण धाराएं (भारतीय न्याय संहिता के तहत):
धारा 64(1) – बलात्कार के सामान्य प्रावधान
धारा 64(2)(d) – विश्वास का दुरुपयोग करके यौन संबंध बनाना
धारा 3(5) – सामूहिक बलात्कार (गैंगरेप)
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पीड़िता के “अधिवक्ता” विक्रम सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की जिन धाराओं के तहत यह मामला दर्ज हुआ है, उनमें अंतरिम राहत (Interim Relief) का कोई अवसर नहीं बनता। उन्होंने कहा, “हमारी प्राथमिकता है कि पीड़िता को पूर्ण न्याय मिले। जरूरत पड़ी तो हम सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे। आरोपी को सजा दिलाकर ही रहेंगे।”

