Sunday, April 12, 2026
No menu items!
HomeEntertainmentअंधाधुन और दृश्यम के बाद ‘थ्रिलर सिनेमा’ का पुनर्जन्म: दर्शक अब सिर्फ...

अंधाधुन और दृश्यम के बाद ‘थ्रिलर सिनेमा’ का पुनर्जन्म: दर्शक अब सिर्फ मसाला नहीं चाहते

🔰 परिचय: बदलते सिनेमा, बदलते दर्शक

पिछले एक दशक में भारतीय सिनेमा में बड़ा बदलाव देखा गया है — खासतौर पर थ्रिलर सिनेमा के प्रति दर्शकों की बढ़ती रुचि ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब वे केवल मसाला, नाच-गाना और सतही रोमांस नहीं चाहते।
‘अंधाधुन’ (2018) और ‘दृश्यम’ (2015) जैसी फिल्मों ने न केवल थ्रिलर शैली को पुनर्जीवित किया, बल्कि यह भी दिखाया कि कहानी, निर्देशन और ट्विस्ट ही अब दर्शकों को सिनेमाघर तक खींच सकते हैं।

अब जुलाई 2025 में, हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म “शून्य संकेत” जैसी थ्रिलर फिल्मों की सफलता ने एक बार फिर इस बात पर मुहर लगा दी है कि थ्रिलर सिनेमा का पुनर्जन्म हो चुका है, और यह भारतीय सिनेमा का अगला बड़ा ट्रेंड बनता जा रहा है।

✍🏻 विश्लेषणरुपेश कुमार सिंह


🎬 थ्रिलर सिनेमा की ताकत: मनोरंजन से आगे का अनुभव

थ्रिलर फिल्मों की एक अनूठी विशेषता होती है – कथानक में तनाव, मानसिक उलझन और अप्रत्याशित मोड़। ये फिल्में दर्शकों को केवल दर्शक नहीं रहने देतीं, बल्कि उन्हें घटनाओं का हिस्सा बना देती हैं।

थ्रिलर क्यों पसंद की जा रही हैं:

  1. दर्शक अब जटिल और बौद्धिक अनुभव चाहते हैं।

  2. OTT ने दर्शकों का स्वाद बदला है, जहाँ नयापन और गहराई की माँग है।

  3. स्टार पावर से ज़्यादा कंटेंट को तवज्जो मिलने लगी है।


🧠 ‘अंधाधुन’ और ‘दृश्यम’ जैसी फिल्मों ने क्या बदला?

🕶️ अंधाधुन (2018)

  • अयुष्मान खुराना अभिनीत यह फिल्म एक दृष्टिहीन पियानो वादक की कहानी थी, जिसमें सत्य, झूठ, और हत्या के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है।

  • इसके निर्देशक श्रीराम राघवन ने यह साबित कर दिया कि थ्रिलर में भी सस्पेंस, कॉमेडी और सामाजिक व्यंग्य का मिश्रण किया जा सकता है।

👨‍👩‍👧 दृश्यम (2015 & 2021)

  • अजय देवगन द्वारा अभिनीत यह फिल्म एक आम आदमी द्वारा किए गए असाधारण अपराध को छिपाने की कहानी है।

  • इसकी पटकथा, संवाद और अंत ने भारतीय दर्शकों को यह एहसास दिलाया कि थ्रिलर भी घरेलू और पारिवारिक स्तर पर असर डाल सकते हैं।

इन दोनों फिल्मों ने एक मजबूत मैसेज दिया – सस्पेंस और कहानी अब दर्शकों को ज्यादा बाँधते हैं बनिस्बत महंगे सेट और सुपरस्टार्स के।


📈 2023-2025 का परिदृश्य: थ्रिलर की वापसी नहीं, प्रभुत्व है

🚨 हालिया उदाहरण (2023-2025):

  • “मौत की परछाईं” (2024) – एक लो-बजट साइक्लॉजिकल थ्रिलर जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।

  • “मायाजाल” (2023) – एक वेब थ्रिलर जिसने अनूठे एडिटिंग स्टाइल और खुली एंडिंग से चर्चा बटोरी।

  • “शून्य संकेत” (2025) – एक नोयर-थ्रिलर जिसने पहले हफ्ते में ₹100 करोड़ का बिजनेस किया, बिना किसी सुपरस्टार के।

इन फिल्मों की सफलता ने निर्माताओं को यह भरोसा दिलाया कि अब नायक के चेहरे से ज़्यादा जरूरी है कहानी की धार


📺 OTT प्लेटफॉर्म की भूमिका: दर्शक अब विश्व सिनेमा देख चुका है

Netflix, Amazon Prime, Zee5 और Disney+ Hotstar जैसे प्लेटफॉर्म्स ने भारत के दर्शकों को Money Heist, Dark, Mindhunter, You और True Detective जैसे इंटरनेशनल थ्रिलर देखने का मौका दिया।

अब जब दर्शक इन स्तर की कहानी देख चुका है, तो वह भारतीय सिनेमा से भी उसी गहराई, तनाव और टर्निंग पॉइंट्स की अपेक्षा करता है।

OTT ने दो बातें स्पष्ट कीं:

  1. लंबी और जटिल कहानी को पसंद किया जा रहा है।

  2. स्टार कास्ट नहीं, बल्कि कहानी ही स्टार है।


🎥 थ्रिलर शैली में तकनीकी सुधार और निर्देशन की बारीकी

🔍 कैमरा वर्क और लाइटिंग:

  • थ्रिलर फिल्मों में शेडो, डार्क टोन और सीमित प्रकाश का प्रयोग दर्शक को कहानी में खींचता है।

  • जैसे अंधाधुन के पियानो वाले सीन्स, या मायाजाल की खामोश रातें

🧩 एडिटिंग:

  • नॉन-लीनियर नैरेटिव (घटनाओं को कालक्रम से न दिखाना) अब आम हो गया है।

  • खुला अंत (open ending) दर्शकों को सोचने पर मजबूर करता है।

🎵 साउंड डिजाइन:

  • थ्रिलर में बैकग्राउंड स्कोर एक किरदार की तरह होता है।

  • जैसे “दृश्यम” में “क्लासिक फिल्म के दृश्य” को गवाही की तरह प्रस्तुत करना।


🔮 भविष्य की दिशा: क्या थ्रिलर भारतीय सिनेमा की नई पहचान बनेगा?

संभावनाएं:

  • युवा दर्शक (18-35 आयु वर्ग) अब थ्रिलर शैली की ओर झुकाव रखता है।

  • महिला निर्देशकों और लेखकों की संख्या थ्रिलर स्पेस में बढ़ रही है।

  • जुर्म, मानसिक स्वास्थ्य, भ्रष्टाचार, डिजिटल अपराध जैसे नए विषय अब थ्रिलर के ज़रिए सामने आ रहे हैं।

चुनौतियाँ:

  • सभी निर्माता थ्रिलर की बारीकियों को नहीं समझते – जबरन ट्विस्ट असफल हो सकते हैं।

  • ‘क्लिकबेट’ थ्रिलर जो केवल शॉक वैल्यू पर चलते हैं, लंबे समय तक नहीं टिकते।

 

यह भी पढ़े: बॉलीवुड में भोजपुरी कलाकारों की बढ़ती मौजूदगी: क्या यह रीजनल से नेशनल ट्रांज़िशन है?

 


🧾 निष्कर्ष: दर्शक अब बदलाव चाहता है, और थ्रिलर उसे वह देता है

2025 तक भारतीय सिनेमा ने यह बात साबित कर दी है कि दर्शक अब केवल नाच-गाने और प्रेम-कहानियों से संतुष्ट नहीं हैं।
उन्हें चाहिए वह सिनेमा जो दिमाग को उलझाए, दिल की धड़कनें बढ़ाए, और कहानी के अंत तक उन्हें सोचने पर मजबूर करे।

थ्रिलर सिनेमा अब केवल एक शैली नहीं, बल्कि सिनेमा के बदलते दौर का प्रतीक है।
और अगर यही प्रवृत्ति बनी रही, तो आने वाले वर्षों में भारत न केवल मसाला फिल्मों का गढ़ रहेगा, बल्कि मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और नोयर थ्रिलर का वैश्विक केंद्र भी बन सकता है।

News Next
News Nexthttp://news-next.in
News Next is a digital news website that covers the latest news and developments from around the world. It provides timely updates on current events, politics, business, crime, technology, and many other important topics that shape society.The platform was founded by independent investigative journalist Rupesh Kumar Singh, who has more than 20 years of experience in journalism. With a strong commitment to credible reporting and in-depth analysis, News Next aims to deliver accurate, unbiased, and insightful news to its readers.Contact us: newsnextweb@gmail.com
RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments